Union Budget 2026 IncomeTax: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए Union Budget 2026 में इनकम टैक्स देने वालों के लिए कई अहम घोषणाएँ की गईं। हालांकि इस बार टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में बड़े सुधार जरूर देखने को मिले हैं। खासतौर पर New Income Tax Act को लेकर किया गया ऐलान टैक्सपेयर्स के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
बजट 2026 में वित्त मंत्री ने साफ किया कि पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- पुरानी टैक्स व्यवस्था में पहले की तरह ₹5 लाख, ₹10 लाख और उससे ऊपर की आय पर वही दरें लागू रहेंगी।
- नई टैक्स व्यवस्था में भी शून्य टैक्स सीमा ₹4 लाख तक बनी रहेगी और इसके बाद आय बढ़ने के साथ टैक्स दरें क्रमबद्ध तरीके से बढ़ती रहेंगी, जो ₹24 लाख से ऊपर की आय पर 30% तक पहुँचती हैं।
सरकार का मानना है कि पिछले वर्ष किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद अभी स्थिरता बनाए रखना जरूरी है, ताकि करदाता बिना भ्रम के अपनी वित्तीय योजना बना सकें।
1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून
Union Budget 2026 का सबसे बड़ा ऐलान New Income Tax Act को लेकर किया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि यह नया कानून 1 अप्रैल से लागू होगा और इससे जुड़े नियम व ITR फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।
यह नया कानून करीब 60 साल पुराने Income Tax Act, 1961 की जगह लेगा। सरकार के अनुसार नया टैक्स कानून:
- राजस्व के लिहाज से न्यूट्रल रहेगा
- टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा
- कानून की भाषा को आसान बनाएगा
- अस्पष्ट प्रावधानों को हटाकर विवाद और मुकदमेबाजी कम करेगा
नए कानून में धाराओं और टेक्स्ट की मात्रा लगभग 50% तक कम कर दी गई है, जिससे आम करदाताओं के लिए इसे समझना आसान होगा।
‘Tax Year’ की नई व्यवस्था से प्रक्रिया होगी आसान
नए आयकर कानून में एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब Assessment Year और Previous Year की जटिल व्यवस्था खत्म कर दी जाएगी। इसकी जगह एक ही “Tax Year” की अवधारणा लाई जा रही है।
इससे न केवल टैक्स कैलकुलेशन सरल होगी, बल्कि ITR फाइल करने और रिफंड प्रक्रिया में भी आसानी होगी। खास बात यह है कि अब देरी से ITR फाइल करने पर भी TDS रिफंड क्लेम किया जा सकेगा, वो भी बिना किसी अतिरिक्त पेनल्टी के।
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बायबैक पर टैक्स नियमों में बदलाव
बजट 2026 में शेयर बाजार से जुड़े टैक्सपेयर्स के लिए भी अहम बदलाव किए गए हैं। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब शेयर बायबैक पर सभी शेयरहोल्डर्स के लिए टैक्स कैपिटल गेन के रूप में लगेगा।
इसके अलावा:
- कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर बायबैक से जुड़ा प्रभावी टैक्स 22% होगा
- नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स पर यह टैक्स 30% रहेगा
इस बदलाव का उद्देश्य टैक्स सिस्टम में समानता लाना और टैक्स आर्बिट्राज को रोकना है।
नॉन-रेजिडेंट टैक्सपेयर्स को राहत
Union Budget 2026 में नॉन-रेजिडेंट टैक्सपेयर्स को भी राहत दी गई है। जो नॉन-रेजिडेंट प्रेज़म्पटिव टैक्सेशन के तहत टैक्स देते हैं, उन्हें अब Minimum Alternate Tax (MAT) से छूट मिलेगी।
साथ ही IT सर्विसेज के लिए Safe Harbour लिमिट को ₹300 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दिया गया है, जिससे टेक सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
STT और TCS दरों में बदलाव
बजट में वित्तीय लेन-देन से जुड़े टैक्स में भी कुछ संशोधन किए गए हैं:
- फ्यूचर्स पर Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाकर 0.05%
- ऑप्शंस प्रीमियम पर STT बढ़ाकर 0.15%
- शराब, स्क्रैप और मिनरल्स पर TCS दर को घटाकर 2% किया गया
इन बदलावों का मकसद टैक्स कलेक्शन को तर्कसंगत बनाना और बाजार में संतुलन बनाए रखना है।
Union Budget 2026 IncomeTax: निष्कर्ष
Union Budget 2026 भले ही इनकम टैक्स स्लैब के लिहाज से “नो-सरप्राइज” बजट रहा हो, लेकिन New Income Tax Act, टैक्स प्रक्रिया की सरलता, विवादों में कमी और डिजिटल-फ्रेंडली सिस्टम की दिशा में यह बजट एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार का फोकस साफ है—टैक्स दरें स्थिर रखते हुए सिस्टम को इतना आसान बनाना कि टैक्सपेयर्स बिना डर और भ्रम के ईमानदारी से टैक्स चुका सकें। आने वाले समय में इसका असर मिडिल क्लास, सैलरीड लोगों और बिज़नेस टैक्सपेयर्स तीनों पर साफ दिखाई देगा।









